7.12.11

हाथ का साथ ....




अईसे काहे बघुआ के, अंखिया तरेर के देख रहा है बे,
साला..नंगा..भुक्खर ...???

आ ...समझा !!! ... भूखा है ???
त ई से हमको मतलब..???
सब अपना अपना भाग का खाते हैं...
हम भी अपना पुन्न का स्टाक से खा और इतरा रहे हैं...
तू भूखा.. नंगा... ई तोरा भाग...
त फिर हमरा भरलका मलाईदार छप्पन भोग थरिया देख के ई जलन काहे.. ई आक्रोस काहे..आयं  ??

चल भाग इहाँ से..

नहीं भागेगा..??

त,,, का कल्लेगा बोल..???

जल्ला कट्टा बोली मारेगा...???

हा हा हा हा...कैसे ??

तोरा जीभ त है, हमरे जेब में ...!!!

त,,, अब का ...???

ओ....गोली मारेगा..???

लेकिन कैसे बे...???

हाथ है...???

सबका हाथ काट के हम जमा कर लिए अपना खजाना में...
अब हाथ, केवल औ केवल हमरे पास है...
आ जिसके हाथ में हमरा दिया हाथ है, ओही किसीको भी बोली या गोली, कुच्छो मार सकता है..

एहिलिये न कहते हैं, धड से आके धर लो ई हाथ...ससुर, राज करेगा राज ...!!!

" हमरा हाथ, हमरा हाथ धरने वाले हर जन- जनावर के साथ "



.......................

36 comments:

रविकर said...

बहुत खूबसूरत पोस्ट |
निराला अंदाज |
बधाई ||

संगीता पुरी said...

वाह ..

रंजू भाटिया said...

वाह बहुत अलग सी पोस्ट बढ़िया

अरुण चन्द्र रॉय said...

वाकई हमारे हाथ किसी ने काट लिए हैं... गंभीर लघुकथा...

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

हाथ हो या हाथी.. घर-घर देखा एक्के लेखा!! नए फोर्मेट में गहरी बात!! तीखा व्यंग्य!!

Avinash Chandra said...

वाह!

प्रवीण पाण्डेय said...

हाथ के साथ,
कर ली सब बात।

Gyan Dutt Pandey said...

हाथों हाथ लेने योग्य पोस्ट!
ब्लॉगिंग का यह प्रयोग अच्छा लगा।

Manish Kumar said...

बड़ा करारा हाथ मारा है आपने उस 'हाथ' पर !

rashmi ravija said...

बहुत ही सटीक व्यंग्य

डॉ. मोनिका शर्मा said...

एकदम सटीक .... कितना कुछ कह गयीं आप....

Pallavi saxena said...

saarthak evam sateek prastuti ....

Shikha Kaushik said...

badhiya vyangy .badhai

Dr.NISHA MAHARANA said...

good presentation.

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

nayee bhaasha sekhne ko mili!

निर्झर'नीर said...

SIRF YE SAMAJH AAYA KI KI KATAKSH KISPE KIYA GAYA HAI ...OR KUCH NAHIIIIIII,,,,,,,,,,,,AAJKAL AAP LEKHAN SE BILKUL DOOR SI HO GAYII HAI ..

Anonymous said...

हाथ हाथ में गहरी बात कह गयी हैं आप.........तीखा व्यंग्य |

दिगम्बर नासवा said...

हाथ सलामत रह्र्ण पर वो भी आज कहाँ रह पाते अहिं ... गिरवी रहते हैं या खूनी हो जाते हैं ...
आपके रोचक और नए अदाज से परिचय हो रहा है आज ...

Arvind Mishra said...

बढियां कटाक्ष

प्रेम सरोवर said...

बहुत सुन्दर प्रविष्टि.। मेरे नए पोस्ट 'आरसी प्रसाद. सिंह" पर आकर मुझे प्रोत्साहित करें ।.बधाई ।

अनामिका की सदायें ...... said...

jabardast vyangya aur kadva sach jo ugr karne ko kafi hai.

गिरिजा कुलश्रेष्ठ said...

रंजना जी अच्छा व्यंग्य है । कटे हाथ , बँधे हाथ जैसे मुहावरे इसी तरह तो बने हैं । हाँ विराम चिह्नों का सही प्रयोग होता तो ज्यादा स्पष्ट होता ।

V.P. Singh Rajput said...

बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।
मेरा शौक
मेरे पोस्ट में आपका इंतजार है,
आज रिश्ता सब का पैसे से

shikha varshney said...

करार हाथ मारा है ..नए अंदाज में..वाह.

महेन्‍द्र वर्मा said...

हाथ वालों ने हमारे हाथ काट लिए हैं।

बहुत ही तीखा व्यंग्य।

Jyoti Mishra said...

Always a fun to read your writings...
Awesome read as ever... loved the hidden sarcasm !!

प्रेम सरोवर said...

इस पोस्ट के लिए धन्यवाद । मरे नए पोस्ट :साहिर लुधियानवी" पर आपका इंतजार रहेगा ।

Unknown said...

सटीक और करारा व्यंग्य है!!

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

बड़ा ही तीखा कटाक्ष, वाह !!!

देवेन्द्र पाण्डेय said...

तगड़े तेवर हैं...वाह!

Pawan Kumar said...

" हमरा हाथ, हमरा हाथ धरने वाले हर जन- जनावर के साथ "
वाकई प्रभावी है ये पंक्तियाँ

Rakesh Kumar said...

ओह! आह.
सुन्दर प्रस्तुति के लिए वाह!
बहुत ही निराला अंदाज लगा रंजना जी.

मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

सुन्दर,मनोरंजक एवं धारदार प्रस्तुति
वाह....रंजना जी !

Rajput said...

बहुते जोरदार , इ समझो की बस पूरा शरीरवा ही झनझना गइल.
सुन्दर पोस्ट

Smart Indian said...

ग़ज़ब का व्यंग्य है, निर्बल के बल राम!

P.N. Subramanian said...

मन प्रसन्न हो गया. दिन अच्छा कटेगा. आभार.